
फ्रेडी का इरादा सुल्ताना के अड्डे पर अचानक छापा मारकर उसे चौंका देने का था। रास्ता भटक जाने से इस इरादे में खलल पड़ गई। जरूरत इस बात की थी कि सूरज उगने से पहले ही सुल्ताना के अड्डे को अपनी ज़द में ले लिया जाए। नज़दीकी इतनी हो कि पहले इशारे पर ही हमला बोला जा सके।
रहनुमाओं ने ताकीद कर रखी थी कि दिन के वक्त सुल्ताना के चौकीदारों की निगाह में आए बगैर अड्डे तक पहुंच पाना मुमकिन नहीं है। दरअसल चौकसी के मद्देनजर सुल्ताना के अड्डे के दक्खिन में घास की चौड़ी सी पट्टी के सिरे पर, एक ऊँचे पेड़ पर मचान बंधा हुआ था। मचान पर सुल्ताना के दो चौकीदार चौबीस घंटे मौजूद रहते थे। पौ फटने में महज घण्टे भर का समय बाकी था।
क्या किया जाए? क्या किया जाए? टोहते-जोहते अचानक जिम कॉर्बेट किसी लैंड मार्क को ढूंढने की कोशिश में लग गए। जिससे सुल्ताना के अड्डे के पास पहुँचा जा सके।बैलगाड़ियों के एक रास्ते को चिन्हित किया गया। सब तेजी से एक दिशा में बढ़ चले।
इस बीच बरसात थम गई थी और ताजी खुशनुमा हवा के झोंकों से बादल भी साफ हो गए थे। अभी पौ फट ही रही थी कि बैलगाड़ियों के पहियों से बने ढर्रे से उनके कदम लड़खड़ाए। यह एक पुराना ढर्रा था जो अब काम में नहीं आता था। इसी रास्ते का जिक्र रास्ता बताने वाले चरवाहों ने किया था।
लगभग एक मील की दूरी तय करने के बाद शिकार के इस्तेमाल में आने वाली एक पगडण्डी पार करते हुए गहरी और धीमी गति से बहने वाली एक छोटी सी नदी मिली।
नदी के किनारे-किनारे रेंगते हुए अचानक रास्ता बताने वाले कदम धीमे होते-होते थम गए और वे एकबारगी ज़मीन पर लेट गए। बाकी सबने उनका अनुपालन किया। सब पर जाहिर हो गया कि वे सुल्ताना के मचान तक पहुंच गए हैं।
लेटने के बाद नज़र उठने पर सामने मचान दिखाई दिया। एक बहुत बड़े पेड़ पर ज़मीन से करीब तीस-चालीस फीट की ऊँचाई पर मचान बंधा हुआ था।
सबेरे का सूरज इस वक्त जिस ऊँचाई पर था उसकी वजह से मचान पर एकदम सीधे रौशनी पड़ रही थी। मचान पर दो आदमी थे। एक बैठा हुक्का पी रहा था। दूसरा पीठ के बल अधलेटा-सा था और उसके घुटने मुड़े हुए थे।
जिस पेड़ पर मचान बंधा हुआ था उसके एक तरफ घास और पेड़ों का घना जंगल था, दूसरी तरफ लंबा-चौड़ा खुला मैदान। फ्रेडी के गाइडों ने बताया कि सुल्ताना का अड्डा जंगल में अब सिर्फ तीन सौ गज़ भीतर है।
टीम में शामिल सुल्ताना के आदमियों ने ये भी बताया कि मचान पर बैठे दोनों चौकीदार तगड़े निशानची हैं। इसलिए सोच-समझ कर ही उनपर निशाना साधा जाए। घेराबंदी करने वाली पुलिसिया टीम के पास मौजूद असलहों में फ्रेडी के पास उसका सर्विस रिवाल्वर था। एंडरसन निहत्या था। जिम कॉर्बेट राइफल से लैस थे।बाकी सिपाहियों के पास बारह बोर की बंदूकें थीं। अब तक इन बंदूकों की कारगर मार साठ से अस्सी गज तक ही होती है। सीधे तौर पर कॉर्बेट ही वह अकेले आदमी थे जो मचान पर बैठे सुल्ताना के चौकीदारों से निपट सकते थे। लेकिन इंसानों पर गोली चलाने का उनका कोई तज़ुर्बा नहीं था। वह एक शिकारी थे। नाराज़गी और गुस्से में भी वह किसी इंसान पर गोली चलाने के पक्ष में नहीं थे।
उन्होंने दबे पांव जाकर चौकीदारों को दबोच लेने का प्रस्ताव रखा। ऐसा करना उनके लिए आसान था। फ्रेडी की रजामंदी हासिल होने पर कॉर्बेट मचान की तरफ बढ़ चले। पीछे से एंडरसन उनके साथ लग लिए। समझाने बुझाने पर भी जब वह वापस लौटने को तैयार नहीं हुए तो झक मारकर कॉर्बेट को वापस लौटना पड़ा कि शायद फ्रेडी एंडरसन को रोक सकें। दरअसल एंडरसन जंगल में चलते हुए इतनी आवाज़ पैदा कर रहे थे कि हर हाल में जिम की चौकीदारों को दबोचने की योजना पर पानी फिर जाना था।
(क्रमशः)
◆ नीलिमा पाण्डेय, लखनऊ











