
हल्द्वानी। एम.बी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी के वनस्पति विज्ञान विभाग और ‘हिमालयन डायलॉग्स’ के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में उत्तराखण्ड के महान लोक विज्ञानी स्व. चन्द्रशेखर लोहुमी की 123वीं जयंती पर एक बेहद सार्थक संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पी.एस. बनकोटी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध विज्ञान लेखक देवेन मेवाड़ी द्वारा स्व. लोहुमी पर तैयार किए गए वीडियो संगोष्ठी में वक्ताओं ने उनके अद्वितीय वैज्ञानिक और शैक्षणिक योगदान को शिद्दत से याद करते हुए उन्हें मरणोपरांत उचित सम्मान देने और उनके कार्यों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव जारी किया।
विशेष बॉक्स: मुख्य वक्ता प्रो. वीर सिंह के संस्मरण व वैज्ञानिक प्रयोग
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, पंतनगर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रोफेसर वीर सिंह ने स्व. चन्द्रशेखर लोहुमी के साथ बिताए संस्मरणों को साझा करते हुए बताया कि एक साधारण पृष्ठभूमि से होने के बावजूद उनकी दूरदर्शिता गजब की थी।
उन्होंने पंतनगर यूनिवर्सिटी के सहयोग से 1980 से 1984 के बीच मक्के की बेकार समझी जाने वाली ‘गिल्ली’ (कोब) की राख पर गहरा शोध किया और यह साबित किया कि उससे बेहतरीन कीटनाशक और डिटर्जेंट बनाए जा सकते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अभिशाप बन चुकी लैंटाना (कुरी झाड़) को नष्ट करने वाले कीट (लैंटाना बग) की खोज और बिना सिंचाई वाली भूमि के खरपतवार ‘तिपतिया’ के नियंत्रण में उनका योगदान आज भी अतुलनीय है।
- पाठ्यक्रम में समावेश: उत्तराखण्ड के माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में स्व. चन्द्रशेखर लोहुमी के जीवन, संघर्ष और वैज्ञानिक शोधकार्यों को शामिल किया जाए।
- संस्थान का नामकरण: नैनीताल (कार्यक्षेत्र) या अल्मोड़ा जनपद (गृह जनपद) के किसी उपयुक्त शैक्षणिक संस्थान का नाम स्व. लोहुमी के नाम पर रखा जाए।
- शोध एवं प्रोत्साहन: विद्यालयों व महाविद्यालयों में उनकी स्मृति में व्याख्यान, संगोष्ठियां और वैज्ञानिक गतिविधियां आयोजित की जाएं।
- दस्तावेजीकरण: उनके ऐतिहासिक दस्तावेजों और कार्यों का संकलन कर उन्हें स्थायी रूप से संरक्षित किया जाए।
जारीकर्ता: वनस्पति विज्ञान विभाग, एम.बी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी (उत्तराखंड) एवं हिमालयन डायलॉग्स











