
हल्द्वानी। आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने सोमवार को बुद्धा पार्क में प्रदर्शन कर विरोध जताया। यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लाइज के आह्वान पर कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी 36 घंटे की भूख हड़ताल कर रहे हैं। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और एलआईसी से बैंक की प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री तत्काल रोकने और इसका सार्वजनिक क्षेत्र का स्वरूप बनाए रखने की मांग की।
प्रदर्शन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता दीपक बलूटिया ने समर्थन दिया। इसके अलावा एआईबीओसी के अध्यक्ष गौरव जोशी, यूएफबीयू के अध्यक्ष रोहित वर्मा और ओम प्रकाश भी धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। एआईआईडीबीआईओए के महासचिव पीयूष कुमार मौर्य और कार्यकारिणी सदस्य गगन यादव ने भी कर्मचारियों को संबोधित कर उनका उत्साह बढ़ाया।
कर्मचारियों ने वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह की ओर से संसद के दोनों सदनों में आईडीबीआई में कम से कम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने के आश्वासन का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी। कर्मचारियों ने सरकार से इन आश्वासनों का सम्मान करने की मांग की।
यूनियन ने आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री M/s 10955230 Canada Inc. को तत्काल रोकने, बैंक में केंद्र सरकार की न्यूनतम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने, जमाकर्ताओं को सॉवरेन गारंटी देने, मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों एवं पेंशन की लिखित गारंटी देने और बैंक में नियुक्तियों के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को सुरक्षित रखने की मांग की।











