
आज हम जब भी किसी को कहते सुनते हैं कि “लव इज़ ब्लाइंड” तो हमें लगता है कि यह कोई नये ज़माने का मुहावरा है।
दरअसल ये फ्रेज़ ग्रीक माइथोलॉजी का हिस्सा है। यह क़िस्सा साइकी नाम की एक राजकुमारी से जुड़ा है। साइकी बेहद हसीन थी। उसकी खूबसूरती के चर्चे दूर-दूर तक फैले हुए थे। आलम ये था कि लोग मोहब्बत की असल देवी एफ्रोडाइट की उपासना छोड़कर साइकी की एक झलक पाने के लिए दीवाने थे।
अपनी जगह एक आम इंसान को इतनी तवज्जो मिलते देख देवी एफ्रोडाइट गुस्से से आगबबूला हो उठीं। उन्होंने अपने बेटे क्यूपिड, जिन्हें हम प्यार के देवता कहते हैं, को बुलाया और हुक्म दिया कि वे अपने जादुई तीरों का इस्तेमाल करके इस घमंडी साइकी को दुनिया के सबसे बदसूरत और खूँखार राक्षस के प्यार में पागल कर दें। माँ के आदेश पर क्यूपिड हाथ में तीर-कमान लेकर साइकी के कमरे में पहुंचे, जहाँ वह गहरी नींद में सो रही थी। क्यूपिड ने जैसे ही उसे तीर मारने के लिए हाथ उठाया, अचानक उनका पैर डगमगाया और उनका अपना ही जादुई तीर खुद उन्हीं को चुभ गया।
क्यूपिड ने आँखें खोलीं और सामने सो रही मासूम साइकी को देखा। जो तीर साइकी को बर्बाद करने आया था, उसने क्यूपिड को ही उसका दीवाना बना दिया। क्यूपिड जानते थे कि उनकी माँ एफ्रोडाइट इस रिश्ते के खिलाफ आसमान सिर पर उठा लेंगी, इसलिए उन्होंने साइकी से एक जादुई महल में छिपकर शादी कर ली। लेकिन क्यूपिड ने साइकी के सामने एक बेहद अजीब और रहस्यमयी शर्त रखी कि वे दोनों सिर्फ रात के घने अंधेरे में मिलेंगे और साइकी कभी उनका चेहरा देखने की कोशिश नहीं करेगी, क्योंकि जिस दिन उसने उन्हें देख लिया, उनका रिश्ता उसी पल खत्म हो जाएगा।
साइकी ने शर्त मान ली और कई महीनों तक क्यूपिड रोज़ रात के अंधेरे में आते रहे। दोनों बातें करते, हँसते और ख़ुश नुमा वक़्त बिताते। साइकी उनके अच्छे व्यवहार और मीठी आवाज़ की दीवानी होती गई। उसने अपने पति को कभी देखा नहीं था, लेकिन वह उनसे जान से ज्यादा प्यार करती थी। यह इतिहास का पहला ‘अंधा प्यार’ था, जहाँ चेहरे की खूबसूरती मायने नहीं रखती थी, सिर्फ दो दिलों का जुड़ाव था।
लेकिन खुशियों को नज़र लगते देर नहीं लगती। साइकी की बहनों ने उसके कान भरने शुरू कर दिए कि उसका पति ज़रूर कोई भयानक अजगर या राक्षस है। इसीलिए वह उजाले में आने से डरता है। उनके उकसाने पर एक रात, जब क्यूपिड सो रहे थे, साइकी चुपके से उठी। उसने एक हाथ में तेज़ चाकू लिया और दूसरे हाथ में तेल का जलता हुआ दीपक। जैसे ही दीपक की रोशनी क्यूपिड के चेहरे पर पड़ी साइकी के होश उड़ गए क्योंकि बिस्तर पर कोई राक्षस नहीं, बल्कि सुनहरे पंखों वाला दुनिया का सबसे सुंदर देवदूत सो रहा था। साइकी हैरान रह गई, लेकिन तभी दीपक से तेल की एक गर्म बूंद क्यूपिड के कँधे पर जा गिरी। क्यूपिड की आँख खुल गई और सामने रोशनी के साथ साइकी को देखकर उनका दिल टूट गया। क्यूपिड ने नम आँखों से कहा कि प्रेम वहाँ निवास नहीं कर सकता जहाँ विश्वास न हो। इतना कहकर वे अंधेरे आसमान में गायब हो गए।
अपने खोए हुए प्यार को वापस पाने के लिए साइकी रोती-बिलखती हुई भटकने लगी। उसने क्यूपिड की माँ एफ्रोडाइट के पैर पकड़े, जिन्होंने बदला लेने के लिए उसके सामने पाताल लोक से लेकर मौत के कुएं तक की ऐसी खतरनाक शर्तें रखीं जहाँ से बचना नामुमकिन था। लेकिन प्यार में अंधी हो चुकी साइकी ने हर परीक्षा पास कर ली। अंत में क्यूपिड का दिल पिघल गया और वे साइकी को देवताओं की सभा में ले गए, जहाँ देवताओं के राजा ज़ीउस ने साइकी के इस बेमिसाल प्रेम को देखकर उसे हमेशा के लिए अमर देवी बना दिया। यूनानी कला और मूर्तियों में आज भी क्यूपिड की आँखों पर एक पट्टी बंधी दिखाई जाती है।
◆ नीलिमा पाण्डेय, लखनऊ









