
पहाड़ों की खूबसूरती देखने और धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन पहाड़ तक पहुंचने वाली सड़कें और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था उसी अनुपात में मजबूत होती दिखाई नहीं दे रही। नतीजा—हर बड़े अवकाश, पर्यटन सीजन और बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान काठगोदाम से पहाड़ की ओर जाने वाला रास्ता जाम की गिरफ्त में आ जाता है।
शुक्रवार को एक बार फिर यही तस्वीर सामने आई। कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ और तीन दिन की छुट्टियों के चलते काठगोदाम से भीमताल, भवाली और कैंची धाम तक वाहनों का दबाव बढ़ गया। सड़क पर वाहन दौड़ने के बजाय रेंगते रहे। काठगोदाम से भीमताल के महज 27 किलोमीटर के सफर में यात्रियों को करीब तीन घंटे लग गए।
यह सिर्फ शुक्रवार के जाम की कहानी नहीं है। असली सवाल यह है कि जब छुट्टियां, पर्यटन सीजन और धार्मिक आयोजन पहले से तय होते हैं, तो फिर यातायात व्यवस्था हर बार अचानक दबाव में क्यों आ जाती है?
गांधी जयंती के बाद शनिवार और रविवार की छुट्टियां थीं। कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ भी कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी। बावजूद इसके सुबह से ही काठगोदाम-भीमताल मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ता गया और धीरे-धीरे जाम लंबा होता चला गया।
यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह रही कि उन्हें यह पता नहीं था कि आगे रास्ता कब खुलेगा। कई लोग श्राद्ध कर्म और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पहाड़ जा रहे थे। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी घंटों वाहनों में फंसे रहे। कई यात्रियों को रास्ते में भूखे-प्यासे रहना पड़ा।









