
यूपी/ अयोध्या।श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए घटनाक्रम ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच ट्रस्ट ने अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इसके साथ ही ट्रस्ट ने भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सी ई ओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
राम जन्मभूमि परिसर में करीब तीन घंटे तक चली ट्रस्ट की बैठक में नौ स्थायी सदस्यों में से सात सदस्य शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा कथित दान गबन मामले में चल रही एसआईटी जांच की समीक्षा, दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफों पर निर्णय तथा ट्रस्ट के प्रशासनिक पुनर्गठन पर विचार करना था।
बैठक में सर्वसम्मति से ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम व्यवस्था के तहत महासचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रदीप कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। यह समिति योग्य उम्मीदवारों का चयन कर ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपेगी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन की जांच कर रहा है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ सीसीटीवी फुटेज भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कथित घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ किया है तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
बैठक को देखते हुए राम मंदिर परिसर और आसपास अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई। सुरक्षा कारणों से बैठक का स्थान भी अंतिम समय में बदलकर मंदिर परिसर के भीतर किया गया तथा मीडिया और आम लोगों की आवाजाही पर विशेष नियंत्रण रखा गया।
उधर, इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस ने दोनों इस्तीफों को कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वीकारोक्ति बताते हुए पूरे ट्रस्ट के पुनर्गठन और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ रही है और प्रशासनिक सुधारों के जरिए व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में ट्रस्ट में हुए ये बदलाव सामान्य प्रशासनिक फेरबदल से कहीं अधिक महत्व रखते हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ अपने निष्कर्ष तक पहुंचे और नई प्रशासनिक व्यवस्था श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत बनाए। फिलहाल सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और ट्रस्ट द्वारा आगे उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।









