
कालाढूंगी। नयागांव के पास जो हुआ, उसने उत्तराखंड की परिवहन व्यवस्था की हकीकत सड़क पर बिखेर दी।काशीपुर-रामनगर-कालाढूंगी होते हुए नैनीताल जा रही निजी यात्री बस (यूके 04 पीए 0532) के चलते-चलते पीछे के दोनों टायर निकल गए। यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाली लापरवाही की भयावह तस्वीर है।
गनीमत रही कि चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को नियंत्रित कर लिया, अन्यथा कुछ ही दूरी बाद शुरू होने वाले पहाड़ी मार्ग पर यह घटना हुई होती तो परिणाम बेहद दर्दनाक हो सकते थे। बस में बैठे यात्रियों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। कई यात्रियों ने इसे अपनी “दूसरी जिंदगी” बताया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बस का पहिया चलते समय निकल जाए, वह आखिर फिटनेस प्रमाणपत्र लेकर सड़क पर कैसे दौड़ रही थी? क्या परिवहन विभाग की फिटनेस जांच सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित रह गई है? क्या यात्रियों की सुरक्षा से ज्यादा अहम औपचारिकताएं हो गई हैं?
हर वर्ष परिवहन विभाग विशेष अभियान चलाने, फिटनेस जांच और सुरक्षा मानकों का दावा करता है। लेकिन नयागांव की यह घटना उन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। यदि एक यात्री बस की ऐसी स्थिति है, तो पहाड़ों में रोजाना दौड़ रही अन्य बसों की वास्तविक हालत क्या होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने इस घटना को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित बस की फिटनेस किसने और किन परिस्थितियों में पास की, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही सभी यात्री बसों की विशेष तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से पहले व्यवस्था जाग सके।









