
देहरादून। युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनना होगा। जैविक कृषि, जड़ी-बूटी, पर्यटन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिनके माध्यम से पलायन की समस्या का समाधान किया जा सकता है।
राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को उत्तराखण्ड का प्राकृतिक और आध्यात्मिक दायित्व बताते हुए कहा कि हिमालय, नदियों और वनों का संरक्षण भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए सतत विकास का मॉडल प्रस्तुत करने का आह्वान किया।
अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखते रहने, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने तथा राष्ट्रसेवा को जीवन का ध्येय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, संस्कारों और राष्ट्रभक्ति से भारत का गौरव विश्व पटल पर और अधिक ऊंचा करेंगे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, शिक्षकगण, विशिष्ट अतिथिगण, अभिभावकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।








