आशाओं को वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा से वंचित किया जाना अन्यायपूर्ण : श्वेता राज

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हल्द्वानी। ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की हल्द्वानी ब्लॉक की बैठक संपन्न हुई । बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली आशा कामगार यूनियन की राज्य सचिव और स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्वेता राज ने कहा कि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड काल में आशाओं के काम की सराहना की थी. ऐसे में होना तो यह चाहिए था कि आशाओं को पक्के कर्मचारी का दर्जा दिया जाता लेकिन इसके विपरीत देश भर में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशाओं पर काम का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है परंतु न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा से आशायें वंचित हैं। यह बिल्कुल अनुचित और अन्यायपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि, अपने को सामाजिक कार्यकर्ता कहने वाले सांसदों-विधायकों के वेतन भत्ते सरकार लगातार बढ़ाती जा रही है, उनको पेंशन दी जा रही है लेकिन आशा वर्कर्स जो दिन रात मातृ शिशु सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को चला रही हैं उनको दैनिक मजदूर से भी कम पैसा मिल रहा है, यह बेहद शर्मनाक है।

उन्होंने मांग की कि, केंद्र और राज्य सरकारों को आशाओं के मानदेय बढ़ाने के लिए बजट में प्रावधान करना चाहिए जिससे उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिल सके. साथ ही उन्होंने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण आगामी मानसून सत्र में लागू किए जाने की मांग का समर्थन किया।

महिला संगठन ऐपवा की उत्तराखण्ड संयोजक डॉ शिवानी पाण्डेय ने कहा कि, महिला संगठनों की मांग है कि महिलाओं को आरक्षण के सवाल पर बिना किसी किंतु परन्तु के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव और उस से पहले राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में इसे लागू किया जाय। उत्तराखण्ड में परिसीमन को जनसंख्या के आधार पर नहीं बल्कि क्षेत्रफल की आधार पर किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो पहाड़ी राज्य में न तो पहाड़ के मुद्दों को महत्वपूर्ण जगह मिल पाएगी और न ही मजबूरी में शहरों की तरफ आए लोगों की समस्याओं को सुलझा पाएंगे। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे है, लेकिन सरकार इन सवालों को अपराध और न्याय का मामला न बनाकर सांप्रदायिक मामला बन रही है। जिसके खिलाफ एकजुट हो कर लड़ने की बहुत जरूरत है।

ऐक्टू नेता डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, भाजपा सरकार आशा जैसी महिला कामगारों का आर्थिक शोषण कर रही है और उनसे बंधुवा मजदूरों की भांति काम लिया जा रहा है. हमेशा महिला सम्मान का ढोल पीटने वाली सरकार का महिला श्रम के प्रति यह नजरिया बेहद शर्मनाक है।

ब्लॉक अध्यक्ष रिंकी जोशी ने कहा कि, राज्य के मुख्यमंत्री को 31 अगस्त 2021 को खटीमा स्थित कैम्प कार्यालय में आशाओं के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के बाद मासिक मानदेय नियत करने व डी.जी. हेल्थ उत्तराखंड के आशाओं को लेकर बनाये गये प्रस्ताव को लागू करते हुए प्रतिमाह 11500 रूपये का वादा तत्काल पूरा करना चाहिए। अन्यथा आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा।

बैठक में श्वेता राज, डॉ शिवानी पाण्डेय, रिंकी जोशी, रीना आर्य, सरोज रावत, दीपा आर्य, प्रीति रावत, अनीता अन्ना, डॉ कैलाश पाण्डेय, मनीषा आर्य, मीनू चौहान, गीता देवी, शीला सायमा सिद्दीकी, पूनम नेगी, मजु रावत, गीता बोरा, सरिता साहू, गीता जोशी, पुष्पा राजभर, तबस्सुम, राबिया, फातिमा, मुमताज, शोभा, सपना, भगवती पांडेय, कमला गोस्वामी, जानकी थापा, रमा भट्ट, पुष्पा, रेखा चौधरी, तुलसी आर्य आदि समेत बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स शामिल रहीं।

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