
हल्द्वानी। विभिन्न जनवादी संगठनों की ओर से संयुक्त रूप से अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार साल पूरे होने पर भी न्याय न मिलने और वीआईपी को जेल न भेजने पर क्षोभ व्यक्त करते हुए प्रदेश में बढ़ती महिला हिंसा और जातीय हिंसा पर रोक लगाने की मांग उठाते हुए बुधपार्क हल्द्वानी में धरना-प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अंकिता भंडारी को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई।
वक्ताओं ने कहा कि, आज 18 सितंबर 2026 को अंकिता भंडारी हत्याकांड को चार वर्ष पूरे हो गए हैं। चार वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बाद भी अंकिता को न्याय नहीं मिला है इसके लिए पूरे तौर भाजपा की धामी सरकार जिम्मेदार है।
कहा कि, अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। घटना के बाद प्रदेशभर में आंदोलन हुए और जनता ने एक स्वर में दोषियों को कठोरतम सजा तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस मामले में शुरुआत से ही सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक रहा है कि वह वीआईपी कौन था, जिसके संदर्भ में लगातार चर्चाएं और सवाल उठते रहे। क्या उस वीआईपी अथवा प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका की पूरी और निष्पक्ष जांच हुई? क्या जांच के दौरान सामने आए सभी तथ्यों को गंभीरता से लिया गया? क्या उन सभी लोगों की भूमिका की जांच हुई, जिनके बारे में जनता के बीच सवाल उठते रहे हैं?
सरकार द्वारा गठित SIT की जांच, उसके बाद सामने आए तथ्यों और न्यायालय के समक्ष रखी गई सामग्री को लेकर भी जनता यह जानना चाहती है कि आखिर इस पूरे मामले में प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलू की निष्पक्ष जांच किस स्तर तक हुई है।किसी भी जांच का उद्देश्य केवल एक औपचारिक प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि सच्चाई को सामने लाना और प्रत्येक दोषी व्यक्ति को कानून के दायरे में लाना होना चाहिए।
चार वर्ष बाद भी यदि अंकिता के न्याय के लिए जनता को अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ रही है, तो यह अपने आप में गंभीर विषय है। यह न्याय का संघर्ष है और उस व्यवस्था की जवाबदेही का प्रश्न है, जो हर नागरिक को न्याय और सुरक्षा देने का दावा करती है।
धरने के माध्यम से सवाल उठाए गए।
- अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिन VIP आरोपियों दुष्यंत कुमार और अजय कुमार के नाम आए हैं, उनकी जांच क्यों नहीं हुई?
- अंकिता भंडारी हत्याकांड में सबूतों को नष्ट करने की मंशा से वनंत्रा रिसोर्ट पर बुलडोजर चलाने का आदेश देने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की जांच क्यों नहीं हुई?
- अंकिता भंडारी हत्याकांड में सबूतों को नष्ट करने की मंशा से वनंत्रा रिसोर्ट पर बुलडोजर चलवाने की भूमिका में स्थानीय विधायक रेणु बिष्ट और आरती गौड़ की जांच क्यों नहीं हुई?
- अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच के 9 महीने हो जाने पर CBI की जांच शुरू क्यों नहीं हुई?
- अंकिता भंडारी हत्याकांड के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को दिए पत्र को CBI जांच के लिए FIR का आधार न बनाकर अनिल जोशी की FIR क्यों स्वीकार की गई ?
धरने के माध्यम से चेतावनी दी गयी कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि – अंकिता को न्याय दिलाने के लिए VIPs को और उनको बचाने का अपराध करने वालों को जेल की सलाखों के पीछे न लाया जाएगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड की पैरवी कर रहे एडवोकेट नवनीश नेगी को धमकी देने की कड़ी निन्दा का प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की गई कि धमकी देने वालों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई।
धरने में उत्तराखंड सर्वोदय मंडल, भाकपा (माले), भीम आर्मी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, ऐक्टू, मूल निवासी संघ, आइसा, पछास, रचनात्मक कांग्रेस, क्रालोस आदि से जुड़े इस्लाम हुसैन, भुवन पाठक, डॉ कैलाश पाण्डेय, के के बोरा, वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला,
नफीस अहमद खान , रजनी जोशी, प्रभात पाल, आकाश भारती, चंदन, महेश, संदीप टम्टा, रिया, सुन्दर लाल बौद्ध, शादाब, नवीन मूलनिवासी, मुकेश भंडारी, देवेन्द्र बुढ़ाकोटी, विशाल झा, नितिन, नीरज, प्रकाश टम्टा, सुरेश बेरी, अनवर अंसारी आदि शामिल रहे।









