
हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने रुद्रपुर एवं पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता देने से इनकार किए जाने को राज्य की भाजपा सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार हर मंच से उत्तराखंड को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनाने का दावा करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि मेडिकल कॉलेज ही मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। यदि समय रहते नियुक्तियां और संसाधनों की व्यवस्था की जाती, तो आज यह शर्मनाक स्थिति पैदा नहीं होती।
श्री आर्य ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे करने वाली सरकार मेडिकल कॉलेजों में न्यूनतम मानकों के अनुरूप फैकल्टी, प्रयोगशालाएं और आवश्यक संसाधन तक उपलब्ध नहीं करा सकी। इसका सीधा नुकसान उत्तराखंड के हजारों युवाओं और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में आवश्यक फैकल्टी के मुकाबले केवल 13 फैकल्टी उपलब्ध हैं, जबकि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में लगभग 85 फैकल्टी की आवश्यकता के सापेक्ष मात्र 6 फैकल्टी कार्यरत हैं। निर्माण कार्य और आधारभूत सुविधाएं भी अधूरी हैं। यह स्थिति भाजपा सरकार के खोखले दावों की
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि दोनों मेडिकल कॉलेजों में तत्काल युद्धस्तर पर फैकल्टी की नियुक्ति की जाए। सभी अधूरे निर्माण कार्य और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों का स्वतंत्र ऑडिट कर उनकी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।









