
देहरादून। जल निगम में स्पोर्ट्स कोटे में गलत नौकरी पाने वाले अधिशासी अभियंता अशोक प्रजापति की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही चयन समिति के सदस्यों को भी नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा गया है।
जल निगम में 2014 में स्पोर्ट्स कोटे में सहायक अभियंता पद पर भर्ती की गई। बाद में सहायक अभियंता पद पर नौकरी पाने वाले अधिकारी 2023 में अधिशासी अभियंता पद पर भी पदोन्नत हुए। पदोन्नति के दौरान भी गलत तरीके से नौकरी पाने के आरोप लगे। इसके बाद आरोपों पर जांच शुरू हुई।
अब जांच पूरी होने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। जल निगम के स्पोर्ट्स मानकों के अनुसार उन्हीं लोगों को खेल कोटे से नौकरी मिल सकती है, जिन्होंने अखिल भारतीय विश्वविद्यालय स्तर पर पदक जीता हो। राष्ट्रीय जूनियर, स्कूल और सब-जूनियर चैंपियनशिप में पदक जीता हो। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में तीन बार प्रतिभाग करने वालों या केंद्र सरकार के स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वालों को खेल कोटे में नौकरी पाने का पात्र माना जाता है।
जिस प्रतियोगिता के प्रमाणपत्रों के आधार पर खेल कोटे में अधिशासी अभियंता अशोक प्रजापति का चयन हुआ, उसे मानकों के विपरीत माना गया है। इसी आधार पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की पुष्टि की। उधर, जल निगम के एक और अधिशासी अभियंता की नौकरी भी खतरे में है। दो जाति प्रमाणपत्र जमा करने के मामले में जांच चल रही है।
उन्होंने आवेदन के समय बिजनौर और नियुक्ति के समय पौड़ी से बने प्रमाणपत्र जमा कराए थे। दूसरी ओर, सहायक अभियंता विद्युत यांत्रिक के तय पदों से अधिक पदों पर नौकरी प्रकरण की भी जांच चल रही है।








