
देहरादून। पत्रकारिता, साहित्य, हिंदी भाषा और शिक्षा के क्षेत्र में दशकों से अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को उत्तराखंड राज्य गौरव सम्मान से नवाजा गया है। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य राज्योत्सव समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। सम्मान स्वरूप उन्हें प्रशस्ति पत्र के साथ एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी दी गई। डॉ. तिवारी की इस उपलब्धि ने उत्तराखंड की पत्रकारिता, साहित्य और अकादमिक जगत का मान बढ़ाया है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. तिवारी को यह सम्मान पत्रकारिता, लेखन, अध्यापन, शोध और हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है। उन्होंने अपने दशकों लंबे रचनात्मक सफर में पत्रकारिता के व्यावहारिक अनुभव को अकादमिक शोध, इतिहास और साहित्य से जोड़ते हुए उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और सामाजिक सरोकारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
डॉ. तिवारी की उपलब्धियों का दायरा केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। हिंदी लेखन, पत्रकारिता और राजभाषा के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को देश-विदेश में व्यापक सराहना मिली है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में उन्हें उनकी चर्चित पुस्तक ‘ अतीत से वर्तमान तक : नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा’ के लिए प्रतिष्ठित राजभाषा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार के लिए देशभर से चयनित 13 लेखकों में डॉ. तिवारी उत्तराखंड के एकमात्र लेखक थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह सम्मान हासिल करने वाले वह प्रदेश के पहले पत्रकार भी हैं। उनकी इस पुस्तक में नैनीताल के ऐतिहासिक विकास और राजभवन की अद्भुत स्थापत्य विरासत को शोधपरक एवं रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।
उनकी लेखनी और पत्रकारिता का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिला है। अमेरिका, हंगरी और मॉरीशस स्थित भारतीय दूतावासों के साथ ही थाईलैंड और सिंगापुर की प्रतिष्ठित संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने भी उनके शोध, लेखन और पत्रकारिता संबंधी योगदान को सराहा है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके गहन अनुभव और अध्ययन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह पत्रकारिता विषय पर तीन महत्वपूर्ण पुस्तकें लिख चुके हैं। इनमें से एक पुस्तक का विमोचन मॉरीशस के राष्ट्रपति ने वहां राष्ट्रपति भवन में किया था। इसके अलावा उनके दो दर्जन से अधिक शोध पत्र तथा एक हजार से ज्यादा लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। लेखन के माध्यम से उन्होंने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, उसकी चुनौतियों और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया है।











