
फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुल गई है . यह जानकारी सामने आई तो मुझे वर्ष 2017 में अपनी यात्रा याद आ गई साथियों के साथ स्कूटी और बाइक से यात्रा करने का फैसला किया। दोपहिया और फूलों की घाटी? सूनने में थोड़ा अचरज भरा लग सकता है। पर हमने यही तय किया। फूलों की घाटी के रास्ते में जहां तक दोपहिया जा सकता था। वहां तक पहुंचे। इसके बाद कुछ दूर पैदल चलने के बाद कुछ लोगों ने घोड़े के माध्यम से आगे का सफर तय करने का फैसला किया, जिससे सामान को ढोया जा सके।

फूलों की घाटी के बारे में बताया गया था कि एक जगह ही ग्लेशियर, घास के मैदान, भोजपत्र का जंगल, नदी और फूलों से लकदक वैली एक ही जगह में दुनिया में शायद ही कहीं ओर हो। इसी जादुई दुनिया के दीदार को बेताब हम धीरे- धीरे आगे बढ़ रहे थे। रास्ते में प्रकृति की खूबसूरती आपको मोह में बांधे रहती है। बीच में एक स्थान पर खाने-पीने की दुकान मिलती है, जहां पर सुस्ताने के साथ ही खाया पिया जा सकता था।घंटों के सफर के बाद घाघंरिया पहुंचे। जहां पर हमारा रूकने का इंतजाम था।

घांघरिया भी खूबसूरत है, यहां पर फारेस्ट रेस्ट हाउस के साथ ही होटल और रुकने के इंतजाम थे। एक स्वप्न लोक में ले जाने वाली दुनिया। यहां पर खाने- ठहरने का वाजिब इंतजाम रहता है। शाम को घांघरिया घूमने के बाद सुबह ही फूलों की घाटी की तरफ चलने का फैसला किया। बरसात की झड़ी लगी थी, ऐसे में पहले से ही रेन कोट जैसे जरूरी इंतजाम किया था। रूट पर चलते समय क्या सावधानी बरतनी है, उस पर चर्चा की हुई थी। सभी के पास सीटी, माचिस, रेन कोट, जरूरी दवा, पानी, चाकलेट, टॉपी जैसी चीजे थी। आगे बढ़ते ही झरने में हमारा स्वागत किया।

इसके बाद नदी के किनारे रास्ता तय करते हुए आगे बढ़े। चेकपोस्ट पर वन कर्मियों ने हमारे में बारे में पूरी जानकारी लेने के साथ आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया। आगे की चढ़ाई हमारे हौसले का इम्तहान ले रही थी, तो प्रकृति की सुंदरता आगे बढ़ने को प्रेरित भी कर रही थी। भोज पत्र के जंगल से होते हुए जैसे ही फूलों की घाटी में पहुंचे तो वहां की दुनिया सम्मोहित सा कर लिया। फूलों की घाटी, उससे जुड़ा इतिहास, कहांनियां हमारे सामने थी। हम थे और प्रकृति थी। हवाएं हमारा स्वागत कर रही थी।

दोपहर हो चुकी थी, आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल दिया था। मौसम खराब होने की आहट हो रही थी, पर हमारे जाने का मन नहीं हो रहा था। इसके बाद हमने एहितयातन कुछ समय बीताने के बाद लौटने का फैसला किया। पर इस वादे के साथ ही फिर फूलों की घाटी में आएंगे, सितंबर की जगह जुलाई या अगस्त में।

इन बातों का ध्यान रखें
यात्रा से पहले जानकार व्यक्ति के साथ पूरे रूट उसमें लगने वाले समय समेत सभी आवश्यक पहलुओं पर चर्चा और बातचीत जरूर करें।

मौसम की जानकारी कर लें
साथ में आवश्यक दवा और जरूरी सामान जरूर रखें









