
धारचूला । तवाघाट-गुंजी कैलाश यात्रा मार्ग पर मलघाट के पास अचानक पहाड़ी से पत्थरों की बौछार शुरू हो गई। सड़क खोलने में लगे बीआरओ के जेसीबी चालक और मजदूर अपनी जान बचाकर भागे, जिससे बड़ा हादसा टल गया। मलबा साफ होने के बाद अपराह्न तीन बजे यातायात बहाल हुआ, लेकिन एसडीएम ने सभी से सतर्क रहने की अपील की है। दारमा और मल्ला जोहार घाटी में भी सड़कें बार-बार बंद होने से ग्रामीणों व सुरक्षाकर्मियों को भारी परेशानी हो रही है।
मलघाट में बोल्डर और मलबा आने से सड़क बंद हो गई थी। दूसरे दिन पत्थरों की बौछार रुकने के बाद बीआरओ 65 आरसीसी के कार्मिकों ने दो जेसीबी की मदद से सड़क खोलने का कार्य शुरू किया और अपराह्न तीन बजे यातायात शुरू कराया। इस बीच सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतार लगी रही।
गुंजी से आ रहे कई वाहन चालकों ने घंटों इंतजार के बाद सड़क खुलने पर राहत की सांस ली। एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि मलघाट में रुक-रुक बोल्डर गिरने से खतरा बना है। उन्होंने सभी वाहन स्वामियों और स्थानीय ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है।
इधर बीआरओ की 67 आरसीसी ग्रिफ ने कुलागाड़ और एलागाड़ में मलबे से बंद हुई सड़क को खोल दिया। दारमा घाटी की सड़क पर भी आवाजाही जारी है।
दारमा घाटी की विमला दताल, जमन दताल, गुड्डू दताल व व्यास घाटी के ग्रामीण कविंद्र बुदियाल, आमोद गर्ब्याल, लक्ष्मी गुंज्याल, अंजू रोंकली और नगेंद्र कुटियाल ने बताया कि मानसून काल में दोनों घाटी को जोड़ने वाली सड़क आए दिन कई जगहों पर बंद हो जाने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर मुनस्यारी तहसील में सीमांत मल्ला जोहार घाटी को जोड़ने वाली मुनस्यारी-मिलम रविवार को करीब 10 घंटे से अधिक बंद रही। इसके चलते मिलम स्थित आईटीबीपी की अंतिम चौकी के लिए आवाजाही करने वाले जवानों और मल्ला जोहार क्षेत्र के ग्रामीणों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं।
बीआरओ की ओर से धारचूला से तवाघाट और तवाघाट से गुंजी कैलाश यात्रा मार्ग पर चौड़ीकरण, सुधारीकरण कार्य पिछले कई वर्षों से किया जा रहा। कुलागाड़, एलागाड़, मलघाट, गरबाधार और एस बैंड आदि खतरनाक स्थलों पर मलबा, बोल्डर आने से सड़क घंटों बंद रहती है। इससे यात्रियों के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों और सुरक्षा कर्मियों को काफी दिक्कतें होती हैं। इन खतरनाक स्थलों का शीघ्र स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।








