
हल्द्वानी। ऐक्टू समेत केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच, स्वतंत्र क्षेत्रीय महासंघों एवं संगठनों ने आज संघर्षरत मजदूरों के साथ एकजुटता में “राष्ट्रीय मांग दिवस मनाया।
इस मौके पर बुधपार्क में उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (संबद्ध ऐक्टू) द्वारा धरना-प्रदर्शन किया गया और राष्ट्रीय मांग दिवस पर अपनी मांगों को उठाया गया। ऐक्टू प्रदेश महामंत्री के के बोरा ने कहा कि, श्रम संहिताएँ (लेबर कोड) कार्य समय बढ़ाकर और ठेका प्रथा को मजबूत कर शोषण को वैध बनाती हैं। महिला मजदूरों को कार्यस्थल पर हर प्रकार के उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
हालांकि अप्रैल की शुरुआत में एलपीजी की बढ़ती कीमतें मजदूरों आंदोलनों के दूसरे चरण का कारण बनीं, लेकिन असली वजह ठेका प्रथा के जरिए बढ़ता शोषण है। सरकारों ने राहत देने के लिए संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता अपनाया है। पुलिस ने छापेमारी, दमन और निगरानी के जरिए भय का माहौल बनाया है। कई ट्रेड यूनियन नेताओं को झूठे मामलों में फँसाकर जेल में डाला गया है, जबकि अन्य को नजरबंद किया गया है। मजदूरों की वास्तविक समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें “बाहरी” या “राष्ट्र-विरोधी” बताकर आंदोलन को बदनाम किया जा रहा है। स्पष्ट है कि ऐसे तरीकों से स्थायी औद्योगिक शांति संभव नहीं है।
उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि, उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशाओं एक ओर तो न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा कुछ भी नहीं मिलता लेकिन आशा वर्कर्स जो दिन रात मातृ शिशु सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को चला रही हैं उनको सम्मानजनक मानदेय देना भी सरकार को भारी पड़ रहा है और उसमें कटौती की जा रही है। यह बेहद शर्मनाक है।
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी गिरफ्तार मजदूरों और कार्यकर्ताओं की तत्काल एवं बिना शर्त रिहाई; सभी झूठे मुकदमों की वापसी; दमन और अवैध हिरासत का अंत करने की मांग उठाई। कहा कि मजदूर-विरोधी श्रम संहिताओं की वापसी; ट्रेड यूनियनों के साथ तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता; भारतीय श्रम सम्मेलन का शीघ्र आयोजन।
धरना-प्रदर्शन में ऐक्टू प्रदेश महामंत्री के के बोरा, आशा यूनियन अध्यक्ष कमला कुंजवाल, भाकपा माले नेता डॉ कैलाश पाण्डेय, आशा यूनियन हल्द्वानी अध्यक्ष रिंकी जोशी, उधमसिंहनगर अध्यक्ष ममता पानू, धारी ब्लॉक अध्यक्ष मुन्नी बिष्ट, रामगढ़ अध्यक्ष हेमा बिष्ट, सरोज रावत, सायमा सिद्दीकी, सीता कुँवर, जानकी थापा, सुनीता, रश्मि जोशी, दीपा आर्य, मिथिलेश, सरिता साह, प्रियंका, प्रेमा शर्मा, दीपा देवी, भगवती, देवकी, विमला, लीला, पुष्पा आर्य, माया शाह, ममता आर्य, मोहिनी, रेखा गड़िया, पुष्पलता, रेशमा, हुमेरा, हेमा जोशी, दीपा बहुगुणा, कमलेश, रोशनी, अनीता, सुमन बिष्ट, सावित्री, यशोदा, दमयन्ती, जाहिदा, नसीमा, तारा देवी, मीना लता कोहली आदि शामिल रहे। , आशाओं को समर्थन देने बिजली ठेका श्रमिक यूनियन के पान सिंह चिलवाल, किसान महासभा के अमित कोहली, आइसा नेता आकाश भारती भी पहुंचे।








