सीड कंपनी मालिकों पर किसानों के 2.5 करोड़ हड़पने का आरोप धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

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किच्छा। ऊधमसिंहनगर के किच्छा क्षेत्र में गेहूं खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। किसानों ने एक सीड कंपनी के मालिक और उसके पार्टनरों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करीब 300 से 350 किसानों की लगभग 2 से 2.5 करोड़ रुपये की भुगतान राशि हड़पने का आरोप लगाया है। किसानों की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी फर्म के संचालक और उसके चार साझेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्राम नवाबनगर, बहेड़ी, बरेली निवासी सतनाम सिंह पुत्र सरदूल सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि ग्राम गिद्धपुरी, किच्छा निवासी हरेंद्र मलिक की फर्म तराई फार्म सीड्स भारत सरकार के उपक्रम नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) की प्रोसेसिंग यूनिट के रूप में कार्य करती थी। वर्ष 2021 में फर्म के माध्यम से किसानों का पंजीकरण कराया गया और उन्हें गेहूं खरीद का भरोसा दिया गया। योजना के तहत किसानों का भुगतान तीन किस्तों में होना था। आरोप है कि पहली किस्त का भुगतान मिलने के बाद हरेंद्र मलिक ने शेष दो किस्तों के लिए समय मांगा, लेकिन बाद में लगातार टालमटोल करता रहा।

संदेह होने पर किसानों ने सीधे एनएफएल अधिकारियों से संपर्क किया। वहां से मिली जानकारी के अनुसार हरेंद्र मलिक और उसके पार्टनर राहुल पहली किस्त मिलने के बाद जब किसानों को बाकी भुगतान नहीं मिला तो उन्होंने सीधे नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) के अधिकारियों से सपर्क किया। जांच में कथित रूप से पता चला कि किसानों के नाम से फर्जी स्टांप और शपथपत्र लगाकर भुगतान फर्म के खाते में कराया गया। इसके बाद प्रभावित किसानों ने एकजुट होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अब मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

कुमार, राहुल राणा, युवराज तथा चितरंजन ने किसानों के नाम से कथित तौर पर फर्जी स्टांप और शपथपत्र तैयार कर एनएफएल में जमा किए और भुगतान अपनी फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिया। किसानों का आरोप है कि इसी तरीके से 300 से अधिक पंजीकृत किसानों की करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये की भुगतान राशि हड़प ली गई। साथ ही किसानों का अंडर साइज गेहूं भी बाजार में बेच दिया गया। शिकायत में कई किसानों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें ग्राम रिछोली निवासी इकबाल सिंह का मामला प्रमुख बताया गया है। किसानों का दावा है कि इकबाल सिंह 14 मई से 20 जुलाई 2022 तक विदेश में थे, इसके बावजूद 16 मई 2022 को उनके नाम से स्टांप खरीदा गया और 17 मई को कथित फर्जी हस्ताक्षर वाला शपथपत्र एनएफएल में जमा कर उनकी भुगतान राशि भी फर्म के खाते में स्थानांतरित करा ली गई।

खेम सिंह, गुपिंदर सिंह, सरदूल सिंह, रघुवीर सिंह, नवदीप सिंह समेत कई अन्य किसानों के साथ भी धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया गया है। कोतवाल रवि कुमार ने बताया कि किसानों की तहरीर के आधार पर हरेंद्र नलिक और उसके पार्टनरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

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