
हल्द्वानी। भाकपा(माले) नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, “बाबा साहब डॉ अम्बेडकर द्वारा बनाये गए संविधान में गरीबों,वंचितों,महिलाओं, दलितों को आगे बढ़ाने के लिए और लोकतंत्र को मजबूत करने की व्यवस्था की गई है। परंतु वर्तमान मोदी सरकार लोकतंत्र के इन पहलुओं को खत्म करने में जुटी हुई है । बाबा साहब अंबेडकर किसी भी प्रकार के धार्मिक राष्ट्र के सख्त खिलाफ थे और इसे एक बड़ी विपदा मानते थे लेकिन आज भाजपा सरकार लोकतंत्र को खत्म करके तानाशाही भरे हिंदू राष्ट्र में तब्दील करना चाहती है। जिसमें गरीबों वंचितों अल्पसंख्यकों के अधिकारों में कटौती होना तय है।”
डॉ उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि, डा. अम्बेडकर ने देश में जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। डा अंबेडकर ने हमारे देश के संविधान को भेदभाव रहित बनाने का प्रयास किया। और न केवल संविधान बल्कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के लिए भी कानून बनाया। अंबेडकर देश के पहले मंत्री थे जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए बने कानून को पारित न होने पर अपने कानून मंत्री के पद से ही इस्तीफा दे दिया था।
वक्ताओं ने कहा कि, सरकार एक ओर गरीबों वंचितों के खिलाफ नीतियां लागू कर रही है और दूसरी ओर अंबेडकर का नाम लेकर अंबेडकर के विचारों के खिलाफ ही काम कर रही है।
गोष्ठी में डॉ अम्बेडकर के नारे “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” के नारे को बुलंद करते हुए डॉ अम्बेडकर के रास्ते पर चलते हुए अपने गांव के संघर्ष को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में डॉ कैलाश पाण्डेय, डॉ उर्मिला रैस्वाल, वेद प्रकाश, विमला देवी, चंद्र प्रकाश, दीवान सिंह बर्गली, हरीश, परवेज, महेन्द्र, हेमा आर्य, पुष्पा देवी, खीम राम, पूरन राम, ललित प्रसाद, महेश राम, रिहाना, निजामुद्दीन, सविता देवी, पार्वती, सुनीता, दौलत सिंह, तुलसी, हेमा देवी, रेनू , दिनेश चंद्र, शोभा आदि उपस्थित रहे।








