समीक्षा : ‘पुस्तक सफर में इतिहास’, जैसे कोई लंबा सफर खुद पूरा करके लौटी हूं

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मैंने अभी-अभी प्रो. नीलिमा पांडेय की किताब ‘सफर में इतिहास’ पढ़कर खत्म की है, और मन में एक अजीब सी तृप्ति है। जैसे कोई लंबा सफर खुद पूरा करके लौटी हूं। यह किताब 2015 से 2023 तक की लेखिका की आठ साल की यात्राओं का संग्रह है, जिसमें ज्यादातर बौद्ध तीर्थस्थलों (कुशीनगर, सारनाथ, बोधगया, मगध आदि) पर फोकस है, लेकिन इसमें अल्मोड़ा के बिन्सर जैसे हिमालयी इलाकों की यात्राएं भी शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि लेखिका यात्रा को महज घूमने फिरने का नाम नहीं देतीं। उनके लिए ‘यात्रा माने इतिहास से एकरूप हो जाना।

इतिहास के गर्व और शर्म को दोनों हाथों से थाम लेना। यह वाक्य किताब की आत्मा है। वे इतिहास को सिर्फ तथ्यों का ढेर नहीं बनातीं, बल्कि उसे व्यक्तिगत अनुभवों, हास्य, भावुकता, लोककथाओं और पुरातत्व से जोड़कर जीवंत कर देती हैं। कुशीनगर वाले अध्याय में ट्रेन की भीड़, अंकल-आंटी के दस बैग, फ्रूटी पीते हुए होफना, चुरमुराहट का संगीत, गर्मी और चिल्लापों का शोर , ये सब पढ़ते हुए लगता है जैसे मैं खुद उस डिब्बे में हूं।

फिर निर्वाण मंदिर, रामभर स्तूप, चीनी थाई मंदिरों का वर्णन, और सबसे रोचक , बौद्ध-शिव मिश्रण वाली प्रतिमा (जहां बुद्ध शिव की मुद्रा में हैं, और ‘नमो बुद्धाय’ के साथ शिवाय का मेल)। ऐसे विवरण विचारोत्तेजक हैं। बच्चों का क्रिकेट खेलना, स्कूल यूनिफॉर्म में दौड़ना, पर्यटकों की भीड़ , ये छोटी-छोटी बातें स्थलों को जीवंत बनाती हैं। लेखिका लिखती हैं: ‘हमारी स्मृतियों में बुद्ध के महापरिनिर्वाण के हर जिक्र के साथ वह कुशीनगर बार-बार जिंदा हो उठेगा।’ यह यात्रा को भौतिक से आंतरिक स्तर पर ले जाता है । एक तरह का कैथार्सिस, मन की शुद्धि।

बिन्सर महादेव मंदिर (चंद वंश, 12वीं शताब्दी), विवेकानंद का 1897 कनेक्शन, गोलू देवता, बुरांश-देवदार की खामोशी, सूर्यास्त और मौन संगीत , प्रकृति का काव्यात्मक वर्णन इतिहास, लोक परंपरा और आंतरिक चिंतन से इतनी खूबसूरती से जुड़ा है कि पढ़ते-पढ़ते मन शांत हो जाता है। भाषा सरल, बोलचाल वाली, हल्की व्यंग्यात्मक। बिल्कुल आम आदमी की तरह। कोई भारी-भरकम शब्दावली नहीं, फिर भी गहराई कमाल की। पुरातात्विक तथ्य (जैसे कार्लाइल उत्खनन, 1927 की जोड़ाई) भी इतने सहज ढंग से घुले हैं कि बोरिंग नहीं लगते। कुल मिलाकर, ‘सफर में इतिहास’ ऐतिहासिक स्थलों को तथ्यों का संग्रह नहीं, बल्कि भावनाओं और संवेदनशील दृष्टि से जीवंत करती है। यह किताब सिर्फ पढ़ने की नहीं, महसूस करने की है। इतिहास प्रेमियों, यात्रा प्रेमियों और उन लोगों के लिए जो जीवन में गहराई तलाशते हैं ।

यह एक शानदार पढ़ाई है।मैंने इसे 5 में से 4.5 सितारे दिए हैं। बार-बार पढ़ने लायक। किताब अमेज़न, फ्लिपकार्ट या सेतु प्रकाशन की वेबसाइट पर उपलब्ध है (पेपरबैक ₹345, ई-बुक भी)। अगर आप इतिहास को दिल से महसूस करना चाहते हैं, तो इसे जरूर पढ़ें!

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