
देहरादून। हरिद्वार में जमीन घोटाले में निलंबित आईएएस वरुण चौधरी समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ विजिलेंस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें कुछ अधिकारी और संपत्ति बेचने वाले लोग शामिल हैं। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद विजिलेंस ने आरोपियों के घर व अन्य प्रतिष्ठानों पर छापे मारे। विजिलेंस की कुल आठ टीमें बनाई गई थीं जिन्होंने 10 से अधिक जगहों पर छापे मारे और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी विजिलेंस ने अपने कब्जे में लिए हैं।
नगर निगम हरिद्वार ने ग्राम सराय के पास 2.3070 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। यह जमीन कृषि श्रेणी की थी जिसे मनमाने तरीके से बदलकर कमर्शियल कर दिया गया। नगर निगम ने इस जमीन को कुल 54 करोड़ रुपये में खरीदा था। जमीन क्यों खरीदी गई इसका भी कारण स्पष्ट नहीं है। शिकायत होने के बाद प्राथमिक जांच हुई और तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कुल नौ अफसरों को निलंबित कर गया था।
भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच हुई तो पिछले दिनों मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में हुई सतर्कता समिति की बैठक में आईएएस वरुण चौधरी समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ विजिलेंस में प्राथमिकी दर्ज करने की संस्तुति की गई। इसी क्रम में विजिलेंस ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। कई जगह छापे भी मारे गए। यहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज विजिलेंस ने कब्जे में लिए हैं। बताया जा रहा है कि कई दस्तावेज विभिन्न जगहों पर खरीदी गई नामी बेनामी संपत्तियों से संबंधित हैं। इनकी जांच के बाद इन अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं। विजिलेंस की कार्रवाई देर रात तक जारी रही।
विजिलेंस ने नगर आयुक्त हरिद्वार आईएएस वरुण चौधरी, सहायक नगर आयुक्त रवींद्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद मिश्रा, संपत्ति लिपिक वेदपाल, मानचित्रकार दिनेश कांडपाल के अलावा जमीन के विक्रेता व अन्य लोग सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव, सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
विजिलेंस ने छापे की कार्रवाई के लिए कुल आठ टीमों का गठन किया था। इन टीमों ने ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून, रुद्रप्रयाग, दिल्ली और लखनऊ में छापे मारे।









