
हल्द्वानी । भाकपा माले हल्द्वानी ब्रांच द्वारा शहीदे आज़म भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव के शहादत दिवस 23 मार्च की पूर्व संध्या पर उन्हें याद करते हुए कार्यक्रम का आयोजन दमुआढूंगा में किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत भगत सिंह के प्रिय नारे इंकलाब जिंदाबाद – साम्राज्यवाद मुर्दाबाद को बुलंद करके की गयी। भाकपा माले द्वारा शहीदे आज़म भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव के शहादत दिवस 23 मार्च से लेकर शहीद चन्द्रशेखर ‘चंदू’ के शहादत दिवस 31 मार्च तक पूरे देश में “साम्राज्यवाद विरोधी- युद्ध विरोधी” सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि, 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ अपने प्राण न्योछावर किए। उनका बलिदान केवल आज़ादी की लड़ाई का एक अध्याय नहीं, बल्कि शोषण और साम्राज्यवाद के खिलाफ निरंतर संघर्ष का प्रतीक है। भगत सिंह का विचार स्पष्ट था—सिर्फ राजनीतिक आज़ादी काफी नहीं है, असली आज़ादी तब होगी जब मेहनतकश जनता हर प्रकार के शोषण से मुक्त होगी। उन्होंने लेनिन की ही तरह साम्राज्यवाद को “मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण की चरम अवस्था” माना और इसके खिलाफ समाजवादी क्रांति का आह्वान किया।
भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, आज दुनिया एक बार फिर साम्राज्यवादी ताकतों के संघर्षों और युद्धों से जूझ रही है। अमेरिका-इजराइल गठजोड़ के नेतृत्व में साम्राज्यवादी शक्तियों ने आर्थिक और सामरिक हितों के लिए ईरान पर हमला कर दिया है। ईरान, वेनेजुएला समेत तमाम देशों की संप्रभुता को ताक पर रखकर पूरी दुनिया को अमेरिकी साम्राज्यवाद युद्ध में झोंक रहा है। विभिन्न देशों में अपने सैन्य अड्डे स्थापित करना, गैस-तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा, हथियारों की होड़ और सैन्य गठबंधनों का विस्तार दुनिया को अस्थिर बना रहा है। पूरी दुनिया के गरीब देशों को नवउपनिवेश बनाने की साम्राज्यवादी मुहिम चल रही है।
माले नेता ने कहा कि, भारत में भी साम्राज्यवाद के नए रूप दिखाई दे रहे हैं । अमेरिकी हितों के सामने मोदी सरकार का शर्मनाक समर्पण, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉरपोरेट पूंजी का बढ़ता दबदबा, प्राकृतिक संसाधनों की लूट, श्रम अधिकारों पर हमले, लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन, जनता को उनके वास आवास से उजाड़ने पर आमादा बुलडोजर राज, जनता में साम्प्रदायिक विभाजन पैदा करना, देश की आजादी और संप्रभुता को दरकिनार कर अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने पूर्ण समर्पण करते हुए एक नए कंपनी राज का आगाज किया जा रहा है-ऐसे समय में भगत सिंह की साम्राज्यवाद विरोधी क्रांतिकारी विरासत हमें रास्ता दिखाती है।
इस अवसर पर शहीदे आज़म भगत सिंह के विचारों पर चलते हुए देश में आमूल चूल परिवर्तन की लड़ाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने और सम्राज्यवादी युद्धों का विरोध करने संकल्प लिया गया।
इस अवसर पर डॉ कैलाश पाण्डेय, जोगेंद्र लाल, दीपक कांडपाल, मनोज सिंह आर्य, धन सिंह, गोकुल कुमार, मुकेश जोशी, विवेक ठाकुर, रवीन्द्र पाल सिंह, दूधनाथ भारती, चंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह बानी आदि शामिल रहे।








