बिजली दरों पर बवाल: “यूपी में नहीं बढ़ीं कीमतें, तो उत्तराखंड में हर साल क्यों?” जनसुनवाई में फूटा गुस्सा

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देहरादून। उत्तराखंड में प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर आम उपभोक्ताओं से लेकर उद्योग जगत तक में नाराजगी देखने को मिल रही है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में इस बार रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी और बड़ी संख्या में लोगों ने दरों में प्रस्तावित इजाफे पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में कई वर्षों से बिजली दरों में वृद्धि नहीं हुई है, तो उत्तराखंड में लगभग हर साल बढ़ोतरी क्यों की जाती है। इस मुद्दे पर आयोग के सामने आम उपभोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि और पूर्व अधिकारी खुलकर बोले।

सुनवाई में आयोग अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी और सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा मौजूद रहे। प्रस्तावित नई दरों पर चर्चा के दौरान यशवीर आर्य, उम्मेद सिंह, रमेश जोशी और प्रदीप सती सहित कई प्रतिनिधियों ने दर वृद्धि का विरोध किया।

स्मार्ट मीटर को लेकर भी उठे सवाल

जनसुनवाई में स्मार्ट मीटर को लेकर भी उपभोक्ताओं ने शिकायतें दर्ज कराईं। कई लोगों का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली बिल लगभग दोगुना हो गया है। इस पर यूपीसीएल अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को मीटर में गड़बड़ी का संदेह है तो वह शिकायत दर्ज कराए, विभाग चेक मीटर लगाकर जांच करेगा। साथ ही स्मार्ट मीटर प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए गए।आयोग की इस जनसुनवाई में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में उपभोक्ता और उद्योग प्रतिनिधि पहुंचे। इससे साफ है कि बिजली दरों का मुद्दा इस समय राज्य में जनचर्चा का बड़ा विषय बन चुका है।

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