
रुद्रप्रयाग। पिता की मौत के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीना अग्रवाल की अदालत ने दो बेटों अमित राणा और मनीष राणा को गैरइरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साक्ष्य मिटाने के मामले में दोनों को दो-दो साल के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, थाना गुप्तकाशी में दर्ज मामले में अदालत ने 23 अक्तूबर 2026 को फैसला सुनाया। अभियोजन ने चार दिसंबर 2024 को सुबह आठ बजे बलबीर सिंह राणा को अंतिम बार जीवित देखे जाने से लेकर पांच दिसंबर 2024 को सुबह आठ बजे तक की परिस्थितियों को मामले में महत्वपूर्ण बताया। दोनों बेटों पर पिता की हत्या का आरोप लगा था। मामले में शासकीय अधिवक्ता सुदर्शन चौधरी ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कठोर दंड देने की मांग की।
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने दलील दी कि अमित राणा (33) और मनीष राणा (23) करीब दो साल से जेल में निरुद्ध हैं। उनके परिवार में बुजुर्ग दादा और बीमार विधवा मां हैं, जिनकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 सहपठित धारा 3(5) के तहत दोनों को 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। वहीं, धारा 238 (ख) सहपठित धारा 3 (5) के तहत साक्ष्य मिटाने के मामले में दोनों को दो-दो साल का कारावास दिया। जुर्माना अदा नहीं करने पर उन्हें अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।











